डूटा की जवाबदेही और जनतंत्र को वापस लाने के लिए डीयू शिक्षकों के सत्याग्रह का छठा दिन

  • डूटा के सभी सदस्य शिक्षको ने डूट कार्यकारणी और सभी कॉलेजों के स्टाफ़ एसोसिएशन की बैठक आयोजित करने की मांग की है

नई दिल्ली. लॉकडाउन की इस स्थिति में हम रोज मजदूर और कमजोर वर्ग के लोगों की मुश्किलों और पीड़ा के बारे में सुन रहे है. ये ऐसा वर्ग है जो आज सबसे ज्यादा परेशानी में है. इंडिपेंडेंट टीचर्स कलेक्टिव (आईटीसी) जो कि दिल्ली विश्वविद्यालय के स्वतंत्र शिक्षकों का संगठन है.

संगठन ने दिल्ली दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) से अपील की है कि वे इस संकट के समय में देश के मजदूरों के साथ खड़ा रहे. आज जहां देश में अफरा-तफरी का माहौल है. वही देश के बड़े विश्वविद्यालयों में से एक दिल्ली विश्वविद्यालय बिलकुल संवेदनहीनता और मनमाने ढंग से कार्य करते हुए ऑनलाइन पढाई और ऑनलाइन परीक्षा आयोजित करने का आदेश दे दिया है.

यह जानते हुए कि यह गलत है. यहां तक की इसमें प्रशासन ने वैधानिक संस्थाओं जैसे अकादमिक परिषद और कार्यकारी परिषद तक की सलाह लेनी जरूरी नहीं समझी. विश्वविद्यालय की इन परिषदों में निर्वाचित शिक्षक प्रतिनिधि और शिक्षाविद होते हैं.

आज के समय में विश्वविद्यालय उनसे सलाह किए बिना अधिसूचनाएं जारी कर रहा है. आज दिल्ली यूनिवर्सिटी शिक्षक के सबसे बड़े संगठन डूटा भी इस मसले पर शिथिलता बरत रहा है. डूटा की इस उदासीनता के कारण सभी शिक्षकों में रोष है.

सरकार और डीयू प्रशासन के इस उदासीनता को लेकर डीयू की प्रोफेसर डॉ. माया जॉन पिछले 6 दिनों से सत्याग्रह पर हैं. उन्होंने डूटा को पत्र लिखकर तुरंत डूटा कार्यकारिणी और सभी कॉलेजों की स्टाफ एसोसिएशन की इस मुद्दे पर मीटिंग बुलाने की मांग की है.

अपने सत्याग्रह के दौरान प्रोफेसर सादा भोजन मसलन बिना नमक और मसाले का सिर्फ एक बार खाना खा रही हैं. मई के महीनें जब तापमान बढ़ता जा रहा है वो न ही एसी और न ही पंखा प्रयोग में ला रही हैं. इसके अलावा जमीन पर सोना, कंघा न करना, शीशे का प्रयोग न करना. टीवी- यूट्यूब जैसे मनोरंजन से दूर रह कर अपना सत्याग्रह निभा रही है. सत्याग्रह के जरिए ये दो मांगे मांग रही हैं.

राष्ट्रीय मांगें

  • प्रवासी कामगारों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित हो और अंतर्राज्यीय प्रवासी कामगार अधिनियम में निर्धारित यात्रा भत्ता दो
  • विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा वैधानिक श्रम कानूनों के स्थगन का फैसला तुरंत वापस हो
  • कामगार गरीबों के लिए राशन और तीन-महीने का मूलभूत न्यूनतम वेतन का प्रावधान हो
  • शहरी गरीबों के किराए पर रोक लागू की जाए
  • कामगार गरीबों और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर दमनकारी कदम बंद करो
  • स्वास्थ्य क्षेत्र में सभी फ्रंटलाइन कामगारों, और ज़रूरी सेवाओं में लगे कामगारों को महामारी भत्ता और सुरक्षा उपकरण सुनिश्चित हो

विश्वविद्यालय समुदाय की मांगें

  • ऑनलाइन परीक्षा का फैसला तुरंत वापस हो
  • एमएचआरडी, यूजीसी और विश्वविद्यालयों द्वारा चुनी गयी समितियों की अनुशंसाओं को रद्द किया जाए. शिक्षकों और कर्मचारियों से सलाह की मांग करो
  • रेगुलर कालेजों, स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (एसओएल) और एनसीडबल्यूईबी के नियमित और कांट्रैक्ट कर्मचारियों, और गेस्ट शिक्षकों को वेतन मिले, जिन्हें लॉकडाउन के दौरान वेतन नहीं मिला है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *