चूहे को बहादुरी के लिए ब्रिटिश संस्था ने दिया गोल्ड मेडल

जीव-जंतुओं या जानवरों की बहादुरी के किस्से अक्सर सुनने और देखने को मिलते हैं. ऐसा ही एक मामला सामने आया है जहां अफ्रीकी नस्ल के एक विशाल चूहे को ब्रिटेन की एक संस्था ने बहादुरी के लिए पीडीएसए गोल्ड मेडल से सम्मानित किया है. इस अफ्रीकी जाइंट पाउच्ड चूहे का नाम मागावा है और वह सात साल का है. उसने सूंघकर 39 बारूदी सुरंगों का पता लगाया. इसके अलावा उसने 28 दूसरे ऐसे गोला बारूद का भी पता लगाया जो फटे नहीं थे. शुक्रवार को ब्रिटेन की एक चैरिटी संस्था पीडीएसए ने इस चूहे को सम्मानित किया.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मागावा को बेल्जियम के गैर लाभकारी संगठन एपोपो ने प्रशिक्षित किया है. यह संगठन वर्ष 1990 से बारूदी सुरंगों का पता लगाने के लिए जानवरों का इस्तेमाल कर रहा है. संगठन के मुताबिक, मागावा का वजन कम है. यदि वह किसी बारूदी सुरंग के ऊपर भी पहुंच जाता है तब भी उसमें विस्फोट नहीं होता. वह टेनिस कोर्ट जितने बड़े मैदान को जांचने में 20 मिनट का वक्त लेता है.

मागावा ने दक्षिण पूर्व एशियाई देश कंबोडिया में 15 लाख वर्ग फीट के इलाके को बारूदी सुरंगों से मुक्त बनाने में मदद की. इस जगह की तुलना आप फुटबॉल की 20 पिचों से कर सकते हैं. यह बारूदी सुरंगें 1970 और 1980 के दशक की थीं जब कंबोडियो में बर्बर गृह युद्ध छिड़ा था. कंबोडियो के माइन एक्शन सेंटर (सीएमएसी) का कहना है कि अब भी 60 लाख वर्ग फीट का इलाका ऐसा बचा है जिसका पता लगाया जाना बाकी है. बारूदी सुरंग हटाने के लिए काम कर रहे गैर सरकारी संगठन हालो ट्रस्ट का कहना है कि इन बारूंदी सुरंगों के कारण 1979 से अब तक 64 हजार लोग मारे जा चुके हैं जबकि 25 हजार से ज्यादा अपंग हुए हैं.

कैसे लगाया बारूदी सुरंगों का पता 

चूहों को सिखाया जाता है कि विस्फोटकों में कैसे रासायनिक तत्वों को पता लगाना है और बेकार पड़ी धातु को अनदेखा करना है. इसका मतलब है कि वे जल्दी से बारूदी सुरंगों का पता लगा सकते हैं. एक बार उन्हें विस्फोटक मिल जाए तो फिर वे अपने इंसानी साथियों को उसके बारे में सचेत करते हैं. उनकी इस ट्रेनिंग में एक साल का समय लगता है.

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