प्रदूषण के कारण हो रही खांसी, तो अपनाएं ये उपाय

नई दिल्ली. सर्दियों का मौसम तो आ गया मगर अपने साथ कई परेशानियां भी साथ लेकर आया है. सर्दियों के मौसम में अब तरह तरह की बीमारियां जौ आमतौर पर परेशान नहीं करती वो अब लोगों को परेशान करेंगी. इस मौसम में सर्दी-जुकाम होना एक आम बात होती है. इसी के साथ खांसी भी लोगों को काफी परेशान करती है.

आमतौर पर खांसी कुछ दिन दवाई लेने के बाद ठीक हो जाती है मगर कई बार खांसी हल्की फुल्की दवाई के बाद भी ठीक नहीं होती है. कई लोगों में सूखी खांसी की समस्या भी देखने को मिलती है. कई दिनों तक दवाई का सेवन करने के बाद भी सूखी खांसी की समस्या से मरीज को निजात नहीं मिल पाता है. ऐसे में ये परेशानी लगातार लंबे समय तक बनी रहती है.

डॉक्टरों का कहना है कि सूखी खांसी का सीधा ताल्लुक दिल्ली-एनसीआर में बढ़ रहे प्रदूषण से है. आमतौर पर प्रदूषण बढ़ने से सांस संबंधित बीमारियों के मामलों में इजाफा देखने को मिलता है. मगर सर्दी के मौसाम में जब वायु प्रदूषण बढ़ता है तो सूखी खांसी की समस्या भी बढ़ जाती है.

कई मामलों में ठीक होने में लग जाते हैं महीनों

आमतौर पर माना जाता है कि खांसी जल्दी ठीक हो जाती है. मगर प्रदूषण से भरी हवा में सांस लेने के कारण अस्थमा, फेंफड़ों की बीमारी, ह्दय रोग होने का खतरा बढ़ जाता है. इसी कड़ी में सूखी खांसी व सूखी नाक भी ऐसी समस्या है जो इन दिनों काफी आम हो गई है. डॉक्टरों के मुताबिक जब किसी व्यक्ति को साधारण जुकाम की समस्या होती है तो खांसने पर पीला या हरे रंग का कफ निकलता है.

मगर जब प्रदूषण भरे वातावरण में सांस लेते हैं और पीएम 2.5 कणों वाली प्रदूषित हवा जब सांस सेते हुए शरीर के अंदर जाती है तो सूखी खांसी होने लगती है. इस तरह की खांसी आने पर किसी तरह का बलगम या कफ नहीं निकलता है. मगर ये खांसी लंबे समय तक रहती है. कई मामलों में इसे ठीक होनें में महीनों का समय भी बीत जाता है.

प्रदूषण से वायुमार्ग होता है संकीर्ण

सर्दी के मौसम में तापमान कम होने लगता है. इस मौसम के बारे में डॉक्टरों का कहना है कि बाहर की हवा शुष्क यानी ड्राई होने लगती है. ड्राई हवा में प्रदूषण के कण भर जाते हैं. सांस लेने के दौरान अनजाने में ये प्रदूषित कण शरीर के अंदर पहुंच जाते हैं जो हमारे वायुमार्ग को संकीर्ण यानी संकुचित या छोटा कर देती है. इस कारण सूखी खांसी आने की शिकायत होने लगती है. इस दौरान गले में जलन और खुजली होने की शिकायत भी देखने को मिलती है.

श्लेष्म झिल्ली में होती है नमी

वायु प्रदूषण के कारण सूखी खांसी एक आम समस्या बन गई है. इसी के साथ सूखी नाक की समस्या भी एक दिक्कत बन गई है. सूखी नाक की समस्या का मुख्य कारण हमारी नाक की श्लेष्म झिल्ली में नमी की कमी हो जाती है. हवा में नमी की कमी और सर्दियों के मौसम में हीटर का इस्तेमाल भी अधिक होता है. ऐसे में नाक में सूखेपन की समस्या हो जाएगी.

वैसे तो सूखी नाक की दिक्कत कोई नुकसान नहीं पहुंचाती, लेकिन अगर इसका इलाज समय पर न किया जाए तो आने वाले समय में ये बड़ी समस्या बन जाती है. इसमें नाक में खुजली होना, जलन, नाक से खून निकलना आदि समस्याएं आम हो जाती हैं.

इन उपायों से करें सूखी खांसी का इलाज

शहद – इसमें विटामिन सी, डी, ई, के और बी कॉम्प्लेक्स की भरपूर मात्रा होती है. इसके अलावा ये एंटीऑक्सीडेंट्स से भी भरपूर होते हैं. ये शरीर की इम्यूनिटी मजबूत बनाने में मदद करते हैं. इसमें एंटी इंफ्लेमेटरी, एंटी बैक्टीरियल और एंटी फंगल प्रॉपर्टी होती है. सूखी खांसी दूर करने में शहद के ये सभी गुण काम आते हैं. स्टडी में भी सामने आया है कि शहद सूखी खांसी के लिए कारगर उपाय है.

एक कप गर्म पामी या फिर हर्बल चाय में शहद डालकर दिन में 2 बार इसे पीएं. इसके अलावा आप एक छोटा चम्मच अदरक के रस में छोटा चम्मच शहद डालकर भी दिन में 2-3 बार खा सकते हैं.

तुलसी – तुलसी में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं. ये सूखी खांसी का इलाज करने में मददगार साबित होती है. तुलसी में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं. ये बैक्टीरिया को मारने में बहुत मदद करते हैं.

तुलसी की पत्तियों को सुबह खाली पेट खाएं. 4-5 पत्तियां कच्चा खाने की कोशिश करें. इसके बाद एक गिलास पानी को उबालें और उसमें तुलसी की 4-5 पत्तियां डालें और पानी आधा रहने पर उसे छानें और पीएं.

स्टीम लें – स्टीम संकुचित श्वसन प्रणाली को खोलने में मदद करती है. प्रदूषण से श्वसन प्रणाली संकुचित हो जाती है. ऐसा करने से सूखी खांसी की समस्या से निजात मिल सकती है. स्टीम लेने से बैक्टीरिया और वायरस से भी लड़ने में मदद मिलती है.

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