हजारों बेसहारा लोगों का सहारा बने अर्जुन, खाना खिलाकर पहुंचा रहे मदद

दूसरो के दुख को बड़ा समझना आजकल कोई आम बात नहीं है. व्यक्ति की नजर में सिर्फ अपना दुख अपनी परेशानी ही सबसे बड़ी होती है. मगर कोरोना वायरस के फैलते संक्रमण और फिर लॉकडाउन ने एक भागदौड़ भरी जिंदगी से राहत दी है.

इस मुश्किल भरे वक्त में कई ऐसे चेहरे भी देखने को मिले हैं जिनके लिए समाज के वंचित, जरूरतमंद लोगों की मदद सबसे पहले है. अपने गम भुला कर भी कोई कैसे दूसरों को मुस्कान दे जाता है. इसका उदाहरण हैं अर्जुन सिंह. दिल्ली के संगम विहार इलाके के रहने वाले अर्जुन सिंह ने लॉकडाउन में जो काम किया है वो काबिले तारीफ है. आज के कॉम्पिटीशन के जमाने में जब लोग भागदौड़ में व्यस्त हैं. वहीं अर्जुन नौकरी न होने के बाद भी मजदूरों, प्रवासियों की मदद करने में जुटे हुए हैं.

24 मार्च से पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) देश में लॉकडाउन की घोषणा कर चुके हैं. इसके बाद लॉकडाउन लगातार बढ़ाया जा रहा है. इस समय देश में लॉकडाउन 4 चल रहा है. लॉकडाउन 4 में सरकार ने जनता को कुछ रियायतें भी दी हैं.

मगर इन रियायतों के बाद भी मजदूरों और जरूरतमंदों के लिए जीवन यापन करना मुश्किल हो रहा है. ऐसे ही लोगों की मदद बीते 24 मार्च से कर रहे हैं अर्जुन. अर्जुन के इस कदम में उनकी मदद करने वाले मोहित बैसोया ने बताया कि नौकरी नहीं होने के बाद भी दूसरों के दर्द को समझते हुए वो लगातार जनता की मदद कर रहे हैं.

अपने इस काम से उन्होंने अबतक 500 से अधिक लोगों को मदद पहुंचाई है. वो लगातार संगम विहार के अस्थल मंदिर के बाहर या कॉलोनी में कैंप लगाकर जरूरतमंदों को मुफ्त में राशन बांट रहे हैं. अर्जुन का कहना है कि कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं रहना चाहिए. जबतक हमारे पास खाना है हमें उन लोगों को देना चाहिए जिनके पास इसकी कमी है. भूख के कारण किसी की जान नहीं जानी चाहिए, क्योंकि भूख लाइलाज बीमारी नहीं है.

अब 2000 तक पहुंच रही मदद

पहले जहां अपने दम पर अर्जुन 500 लोगों को राशन और खाना दे रहे थे. वहीं अब 2000 लोगों तक ये मदद पहुंच रही है. अर्जुन की पहल में परिवार, सोसायटी और कॉलोनी के लोगों का भी साथ मिल रहा है. अर्जुन, मोहित व स्थानील लोगों के जज्बे को देखते हुए अब सरकार ने भी उनकी मदद के लिए आगे आई है. अब लोग आर्थिक मदद करने के लिए भी आगे आ रहे हैं.

The Depth

TheDepth is India's own unbiased digital news website.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *