डिप्लोमा धारकों को भी मिले, एमडी एमएस के समान अधिकार

  • यूनाइडेट डिप्लोमा ने उठाई मांग
  • एसोसिएशन के मुताबिक सरकार डिप्लोमा धारकों के साथ करती है भेदभाव

नई दिल्ली. कोरोना वायरस संक्रमण को देखते हुए इस समय हजारों मेडिकल कर्मी इससे निपटने के लिए अस्पतालों में ड्यूटी कर रहे हैं. इन मेडिकल कर्मियों में डॉक्टरों के अलावा वो कर्मचारी भी शामिल हैं जिन्होंने एमडी (Doctor of Medicine) या एमएस (Master of Surgery) जैसी डिग्री नहीं की हो.

संकट के इस समय में मेडिकल फिल्ड से जुड़ा हर कर्मचारी अपनी ड्यूटी पूरी तनमयता के साथ निभा रहा हा. मगर सरकार मेडिकल कर्मियों की परेशानियों पर गौर करने की जगह उन्हें उनसूना करने में लगी हुई है. यूनाइडेट डिप्लोमा डॉक्टर्स एसोसिएशन मेडिकल फिल्ड से जुड़ी ऐसी ही समस्या को उठा रहा है. इस संबंध में एसोसिएशन ने राज्य सरकार के अधिकारियों, मंत्रियों से लेकर केंद्रीय मंत्रियों, स्वास्थ्य मंत्री और प्रधानमंत्री को भी पत्र लिखा है.

ये मामला जुड़ा है मेडिकल फिल्ड में पीजी डिप्लोमा करने वाले उम्मीदवारों से. डिप्लोमा करने वाले उम्मीदवारों का सिलेबस, एग्जाम पैटर्न सब एमडी और एमएस कर रहे छात्रों के बराबर होता है. दोनों कोर्स में मात्र एक अंतर है जो कि साल का होता है. एमडी या एमएस करने में जहां तीन वर्ष का समय लगता है व हीं डिप्लोमा कोर्स करने में दो साल लगते हैं.

एक वर्ष का कम कोर्स करने के कारण डिप्लोमा धारकों को करियर में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है. सालों का एक्सपीरियंस होने के बाद भी डिप्लोमा करने वाले उम्मीदवारों को एमडी या एमएस के समान न ही वेतन मिलता है और न ही डेजिग्नेशन. ऐसे में यूनाइडेट डिप्लोमा डॉक्टर्स एसोसिएशन ने मांग की है कि सरकार को नई सुविधा के तहत डिप्लोमा धारकों को आगे बढ़ने के मौके देने चाहिए. इस संबंध में एसोसिएशन ने ट्वीटर पर भी अपनी मांग कई बार उठाई है.

एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर ऋषिकेश सिंह ने TheDepth से बातचीत में बताया कि देश में 30-40 हजार ऐसे कैंडिडेट्स हैं जो एमडी या एमएस की डिग्री करने की जगह पीजी डिप्लोमा कोर्स करते हैं. एक कोर्स जब तीन साल का है और एक कोर्स दो साल का है. इसके बाद भी सरकार डिप्लोमा किए हुए उम्मीदवारों को आगे बढ़ने के मौके मुहैया नहीं कराई जाते है.

सरकार लाए नई पॉलिसी

सिंह ने कहा कि सरकार को ऐसी पॉलिसी लानी चाहिए जिसके तहत डिप्लोमा धारकों को भी आगे बढ़ने के मौके मिलें और उनका करियर भी उड़ान भर सके. सरकार को एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया, एक्सपीरियंस के आधार पर एग्जाम लेकर पीजी डिप्लोमा धारकों को भी एमडी एमएस के बराबर का दर्जा देना चाहिए.

कोरोना संकट में आएंगे काम

एसोसिएशन का कहना है कि संकट के इस समय में अगर सरकार पीजी डिप्लोमा धारकों को भी एमडी/एमएस के तौर पर काम करने के अधिकार देती है तो इससे देश की सेवा करने के लिए हजारों डॉक्टरों की संख्या बढ़ जाएगी. पीजी डिप्लोमा धारकों को भी देश की सेवा करने का मौका मिलेगा.

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