IIT खड़गपुर ने बनाया पोर्टेबल डिवाइस, 400 रुपए दीजिए और 1 घंटे में लीजिए कोरोना रिपोर्ट

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) खड़गपुर ने एक पोर्टेबल डायग्नोस्टिक उपकरण विकसित किया है. इसकी खास बात ये है कि इससे कोविड-19 संक्रमण की त्वरित जांच की जा सकेगी वो भी मात्र 400 रूपए में. शनिवार को IIT की ओर से जानकारी दी गई कि उसके शोधकर्ताओं ने एक पोर्टेबल डायग्नोस्टिक उपकरण विकसित किया है, जो मात्र 400 रुपये की अनुमानित लागत पर 60 मिनट में कोरोनावायरस जांच कर रिपोर्ट प्रदान करता है. आईआईटी खड़गपुर ने कहा, “इस पूरे नॉन-इनवेसिव लवाइवा-बेस्ड टेस्ट को बहुत ही कम लागत में लैब्स के उपकरणों में एक विकल्प के रूप में उपयोग कर सकते हैं, यह एक पोर्टेबल डिवाइस है.

दुनिया भर के जानकारों का कहना है कि ये वायरस तभी पकड़ में आएगा जब ज़्यादा से ज़्यादा टेस्ट होंगे. इस कड़ी में IIT खड़गपुर के शोधार्थियों ने एक अद्भुत खोज की है. IIT खड़गपुर के शोधकर्ताओं की माने तो कोरोना जांच अब बेहद सस्ते में की जा सकेगी, वो भी सिर्फ 400 रुपए में. यही नहीं, इसमें रिपोर्ट भी एक घंटे में आपके मोबाइल पर होगी. अनुसंधानकर्ताओं ने वक़्त की ज़रूरत को देखते हुए कम क़ीमत वाला एक ऐसा डिवाइस तैयार किया है, जिससे कोरोनावायरस की जांच सस्ते में हो सकेगी. 

आईआईटी खड़गपुर ने दावा किया है कि इससे ग़रीबों को लाभ मिल सकेगा, क्यों कि अभी भी कोरोना की जांच काफी महंगी है.


‘कोविरैप’ से कोरोनावायरस की जांच


IIT खड़गपुर के शोधकर्ताओं में से एक प्रोफेसर सुमन चक्रवर्ती का कहना है कि ‘कोविरैप’ नाम के उस उपकरण से कोरोनावायरस की तुरंत जांच हो सकेगी. उन्होंने बताया कि इसका परिणाम एक घंटे में मिल जाएगा, जिसे मोबाइल ऐप पर देखा जा सकेगा. उनका कहना है कि इस डिवाइस की क़ीमत दो हज़ार रुपए होगी. जिसका उत्पाद बड़े स्तर पर होता है तो इसकी क़ीमत कम भी हो सकती है. इस उपकरण के पेटेंट के लिए संस्थान ने आवेदन कर दिया है. 

उन्होंने कहा, ‘वर्तमान में जांच के लिए जो तकनीक इस्तेमाल की जा रही है वह बहुत महंगी है. इसके अतिरिक्त अवसंरचनात्मक आवश्यकताएं भी हैं. हमने महसूस किया कि इसका विकल्प आरटी-पीसीआर मशीनों जैसे उपकरण में बदलाव कर उत्पन्न नहीं किया जा सकता. हमने सोचा कि इसके लिए अलग हटकर कुछ करना होगा और जांच की नई तकनीक सामने लानी होगी जो चिकित्सा के मानकों पर खरी उतरे.’

अनुसंधानकर्ताओं के दल में मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के शोधकर्ता शामिल हैं, जिनका नेतृत्व प्रोफेसर चक्रवर्ती कर रहे हैं और स्कूल ऑफ बायोसाइंस के शोधकर्ताओं का नेतृत्व सहायक प्रोफेसर अरिंदम मंडल कर रहे हैं. मंडल ने कहा, ‘कहीं भी ले जाए जा सकने वाला यह उपकरण न केवल कोविड-19 की जांच करने में सक्षम है बल्कि उसी प्रक्रिया से किसी भी आरएनए वायरस का पता लगा सकता है.’

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