सो रही दिल्ली सरकार, बिना वेतन काम कर रहे Corona Warriors

नई दिल्ली. दिल्ली में कोरोना वायरस को हराने के लिए युद्ध स्तर पर लड़ाई जारी है. अस्पतालों में डॉक्टर और मेडिकल कर्मचारी तो इस लड़ाई में जुटे हुए हैं. मगर हॉस्पिटल के बाहर निगमदिल्ली सरकार के शिक्षक, सफाई कर्मचारी, पुलिस कर्मी सब मिलकर कोरोना के खिलाफ जंग में अपने हिस्से का कर्तव्य निभा रहे हैं.

एक तरफ जहां डॉक्टर अपने कर्तव्य को पूरा करने से पीछे नहीं हट रहे हैं. वहीं दिल्ली सरकार है कि अपनी जिम्मेदारी को पूरी तरह से नहीं निभा रही है. संकट के समय में भी दिल्ली सरकार को कोरोना वॉरियर्स तक का ख्याल नहीं है.

दरअसल दिल्ली सरकार के प्रोजेक्ट आम आदमी मोहल्ला क्लीनिक में कार्यरत डॉक्टर्स को मार्च का वेतन अबतक नहीं मिला है, जबकि अप्रैल का पूरा महीना बीतने के बाद मई का महीना भी शुरू हो चुका है. एक तरफ तो जहां डॉक्टर्स, और अन्य मोहल्ला क्लीनिक के कर्मचारी बिना किसी डर के कोरोना के इस माहौल में भी अपनी सेवाएं देने में जुटे हुए है.

वहीं डॉक्टरों व मेडिकल स्टाफ को इतनी मेहनत करने के बाद भी समय पर वेतन का भुगतान नहीं हो रहा है. ये हाल तब है जब कोरोना वायरस से डरे बिना हर मोहल्ले में सबसे आगे यही डॉक्टर खड़े हैं. डॉक्टरों के सपोर्ट के बिना इस जंग से जीत पाना संभव नहीं है.

वहीं इस पूरे मामले पर सबसे हास्यास्पद बात है कि दिल्ली सरकार के कुछ समय पहले ऐलान किया था कि अगर किसी कोरोना वॉरियर की कोरोना वायरस से जंग लड़ते हुए मौत हो जाती है तो उसे सरकार की तरफ से मुआवजा दिया जाएगा.

एक करोड़ का मुआवजा

सरकार ने घोषणा की थी कि कोरोना वायरस से संक्रमित किसी मरीज का इलाज करने या उसकी किसी दूसरी तरह से मदद करने पर संक्रमित हो जाने के कारण अगर किसी की मौत हो जाती है, तो उसके परिजनों को दिल्ली सरकार की ओर से एक करोड़ रूपये की सहायता राशि दी जाएगी.

यानी सरकार के पास किसी कोरोना वॉरियर के मरने पर देने के लिए राशि है. मगर जिंदा रहते हुए उनको राशि देने के लिए सरकार के पास पैसे नहीं है.

कुछ दिन पहले की थी मोहल्ला क्लीनिक की तारीफ

कुछ दिनों पहले ही सीएम केजरीवाल ने भी दिल्ली के मोहल्ला क्लीनिकों की तारीफ की थी. इन क्लीनिक के जरिए दिल्ली की जनता को घर के पास ही स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं. वहीं अस्पतालों की भीड़ से भी जनता को बचना पड़ता है.

पीएम मोदी ने की थी वेतन देने की अपील

सरकार ने ये राशि मेडिकल कर्मियों के अलावा सभी कोरोना वॉरियर्स के लिए घोषित की है. मगर हास्यास्पद है कि एक तरफ जहां एक करोड़ देने के लिए सरकार तैयार है वहीं इन कोरोना वॉरियर्स को वेतन देने के लिए सरकार के पास फंड नहीं है, जबकि मोदी सरकार भी घोषणा कर चुकी है कि किसी कर्मचारी का वेतन न रोका जाए.

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