हिन्दूराव अस्पताल के डॉक्टर पर लगा गंभीर आरोप, तत्काल प्रभाव से सस्पेंड

उत्तरी दिल्ली नगर निगम के बड़े अस्पताल हिन्दूराव अस्पताल एक बार फिर से चर्चा में आ गया है. इस बार अस्पताल ने कोरोना संक्रमण से जूझने के बीच एक डॉक्टर को बर्खास्त कर दिया है. पीड़ित डॉक्टर का नाम पीयूष सिंह बताया जा रहा है.

निलंबन का आदेश

वो अस्पातल में ऑर्थोपैडिक विभाग में जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर के पद पर कार्यरत थे. सिर्फ इतना ही नहीं वो अस्पताल से ही डीएनबी की पढ़ाई भी कर रहे थे जो, झारखण्ड से अपनी पढ़ाई करने दिल्ली में आये है. इस समय उनका लास्ट सेमेस्टर चल रहा है. वहीं निगम ने डॉक्टर पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाया है और उन्हें बर्खास्त करने संबंधित आदेश जारी किए हैं.

उत्तरी दिल्ली नगर निगम की ओर से जारी किए गए आदेश में लिखा गया है कि उन्हें तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया जाता है. इसकी सूचना एडिशनल कमीश्नर, ज्वाइंट डायरेक्टर (DNB)और डायरेक्टर हेल्थ को भी दी गई है.

पीपीई किट बांटने का आरोप

इस बार डॉक्टर पीयूष पर अस्पताल के फेस शील्ड को चुरा कर बांटने का कथित आरोप लगा है. प्रशासन का कहना है कि डॉक्टर ने अस्पताल में इस्तेमाल होने के लिए मंगाए गए फेस शील्ड को अपने चहिते डॉक्टरों को बांट दिए है. उनके इस कदम के बाद उनके खिलाफ निगम ने एक्शन लिया है. यही नही कमिश्नर ने अपने ऑफिसियल ट्विटर एकाउंट से डॉ पीयूष को चोर तक बोल डाला, और मारने की बात भी की है।

हटा दी गयी ट्वीट की फ़ोटो

पहले भी लगे हैं आरोप

ये पहला मौका नहीं है जब इन्ही डॉक्टर पर निगम ने आरोप लगाए हैं. इससे पहले चिकित्सा अधीक्षक ने इन्ही डॉ पीयूष सिंह को मार्च महीने में नोटिस दिया था. उस समय उनपर आरोप था कि उन्होंने ऑर्थोपेडिक्स इमरजेंसी वार्ड की एक छत से पानी बहते हुए की वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करने का कथित आरोप भी लगया गया था.

डॉक्टरों की एसोसिएशन ने की कमिश्नर को निलंबित करने की मांग।

एसोसिएशन द्वारा जारी किया नोटिस
एसोसिएशन द्वारा जारी किया हुआ नोटिस

हालांकि अबतक इस पूरे मामले पर डॉ पीयूष ने अपनी प्रतिक्रिया दिखाते हुए कमिश्नर के द्वारा लगाए गए इलजमो को खारिज किया है. हालांकि इस तरह की घटना का डॉक्टर एसोसिएशन URDA ने निंदा की है. एसोसिएशन का कहना है कि डॉक्टर को बर्खास्त करने से पहले उनकी बात सुनने का अवसर भी दिया जाना चाहिए तथा एसोसिएशन ने मांग की है कि इस आदेश को तत्काल रुप से निरस्त किया जाए और कमिश्नर, डायरेक्टर हेल्थ, चिकित्सा अधीक्षक को तत्काल निलंबित कर स्वतंत्र रूप से उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए जिसमे निगम का या निगम से संभंधित व्यक्ति ने हो।

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