दिल्ली यूनिवर्सिटी में कई महीनों से नहीं मिला वेतन, प्रिंसिपल-प्रोफेसर परेशान

देश भर में इस समय सिर्फ एक ही चर्चा है. कोरोना महामारी की. कोरोना महामारी से निपटने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं. इसके बाद भी कोरोना से पीछा छुड़ा पाना संभव नहीं हो रहा है. एक तरफ जहां सभी कर्मचारी घरों में रहने को मजबूर हैं वहीं दूसरी तरफ दिल्ली यूनिवर्सिटी के कॉलेजों में शिक्षकों व स्टाफ को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है.

वर्तमान में कोरोना महामारी के संकट के बीच दिल्ली सरकार द्वारा पोषित दिल्ली यूनिवर्सिटी के 12 कॉलेज हैं. इन कॉलेजों के प्रिंसिपल, प्रोफेसरों और नॉन टीचिंग स्टाफ को बीते कई महीनों से वेतन नहीं मिला है. दिल्ली सरकार के अंतर्गत आने वाले ये कॉलेज बीते कई महीनों से फंड का इंतजार कर रहे हैं.

सैलरी की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ प्रोफेसरों बीते 20 अप्रैल को सांकेतिक उपवास भी कर चुके हैं. 20 अप्रैल को जारी लॉकडाउन के कारण प्रोफेसरों ने ऑनलाइन माध्यम से अपनी परेशानियां भी साझा की.

वहीं 12 कॉलेज के संयोजन समिति के संयोजक डॉ. सुबोध कुमार ने बताया कि दिल्ली सरकार यूनिवर्सिटी कर्मचारियों के प्रति कितनी संवेदनहीन है. इन 12 कॉलेजों में दिल्ली सरकार द्वारा कई महीनों से सैलरी नहीं दी गई है.

कॉलेज फंड से भुगतान

अभी जब कॉलेज बंद हैं और फंड की आवश्यकता नहीं है तो कुछ कॉलेजों ने स्टूडेंट फंड या अन्य स्त्रोतों सो कॉलेज के प्रोफेसर की सैलरी दी है. मगर कई ऐसे कॉलेज भी हैं जो अबतक प्रोफेसरों और प्रिंसिपलों को मार्च की सैलरी का भुगतान भी नहीं कर सके हैं.

बता दें कि दिल्ली यूनिवर्सिटी और दिल्ली सरकार के बीच सालों से गवर्निंग बॉडी के गठन को लेकर विवाद चला आ रहा है. हालांकि इस विवाद में कॉलेज के टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ की कोई भूमिका नहीं है. मगर यूनिवर्सिटी और सरकार के बीच फंसे पेंच का सीधा असर कॉलेज के स्टाफ पर पड़ता है.

दिल्ली सरकार की ओर से गवर्निंग बॉडी न बनना अमानवीयता का परिचय ही है. संयोजक डॉ. सुबोध कुमार ने कहा कि एक तरफ केंद्र सरकार अपने सभी कर्मचारियों की सैलरी बिना काटे दे रहा है. वहीं दूसरी तरफ दिल्ली सरकार है जो कर्मचारियों की सैलरी रोककर उनकी समस्या और अधिक बढ़ा रही है.

अन्य भत्तों का भी इंतजार

दिल्ली यूनिवर्सिटी में टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ को बेसिक सैलरी के अलावा अन्य भत्ते भी मिलते हैं. मगर सरकार की तरफ से उन्हें न तो मार्च-अप्रैल की सैलरी का भुगतान हुआ है बल्कि उन्हें मेडिकल बिल, एलटीसी बिल, आदि की सुविधा भी नहींं मिल रही है.

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