दिल्ली यूनिवर्सिटी में न हो कोरोना संक्रमण, DFAJ ने लिखा मंत्री को पत्र

  • मानव संसाधव विकास मंत्री को लिखा पत्र
  • नोडल ऑफिसर हो तैनात

शायद ही कोई जगह है जहां कोरोना संक्रमण का खतरा नहीं बचा है. कोरोना ऐसा वायरस है जो कब, कैसे अटैक कर दे कहना मुश्किल है. सरकारी एजेंसियां हो या एक्सपर्ट सभी का एकसुर में कहना है कि वायरस लंबे समय तक रहने वाला है.

ऐसे में दिल्ली यूनिवर्सिटी में कार्यरत प्रोफेसर, कर्मचारियों को भी कई समस्याएं हो रही है. गौरतलब है कि बीते दिनों दिल्ली यूनिवर्सिटी के कर्मचारी कोरोना संक्रमित पाए गए थे. कोरोना संक्रमण दिल्ली यूनिवर्सिटी तक पहुंचने के बाद स्टाफ क्वार्टर में रहने वाले प्रोफेसर, स्टाफ आदि डर के साये में जी रहे हैं.

यूनिवर्सिटी और इसके कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों और यहां पढ़ाने वाली प्रोफेसरों व स्टाफ की परेशानियों को समझते हुए (DFAJ) ने मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक को लेटर लिखा है.

इस संबंध में DFAJ के सदस्य डॉ. सुरेंद्र कुमार ने बताया कि अगर समय रहते कोरोना संक्रमण पर काबू नहीं पाया गया तो इसकी रोकथाम मुश्किल हो जाएगी. इस समय लॉकडाउन के कारण जहां दिल्ली यूनिवर्सिटी का नॉर्थ कैंपस, साउथ कैंपस और सभी कॉलेज बंद हैं.

इस समय यूनिवर्सिटी प्रशासन को जरूरत है कि अभी से ही सोशल डिस्टेंसिंग को मेंटेन करने के लिए कदम उठाए. इसके लिए जरूरी है कि यूनिवर्सिटी में इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर जरूरी बदलाव किए जाएं.

फिजिकल डिस्टेंसिंग का रखें ध्यान

यूनिवर्सिटी-कॉलेज में ऑफिस में फिजिकल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए इसे नए सिरे से तैयार किया जाए. क्लासरूम, लाइब्रेरी, लैब, स्टाफ रूम आदि को भी दोबारा संगठित किया जाए. सोशल डिस्टेंसिंग के कारण जगह कम पड़ने पर अगल क्लासरूम की व्यवस्था छात्रों और प्रोफेसरों के लिए की जाए.

अलग क्लासरूम बनाए जाएं

यूनिवर्सिटी से आग्रह है कि अगल क्लासरूम बनाए जाने की स्थिति में अतिरिक्त गेस्ट, एडहॉक या स्थायी प्रोफेसरों की नियुक्ति की जाए ताकि छात्रों की पढ़ाई के बीच में कोरोना संक्रमण न आ सके. अगर कोई प्रोफेसर, स्टाफ या छात्र कोरोना संक्रमण की चपेट में आ जाता है तो उसके बिल का पैसा वापस किया जाए.

इंफर्मेशन टेक्नोलॉजी का हो इस्तेमाल

संक्रमण से बचाव के लिए अधिक से अधिक इस्तेमाल इंफर्मेशन कम्यूनिकेशन टेक्नोलॉजी का किया जाना चाहिए. इसके इस्तेमाल से कोरोना संक्रमण से बचना संभव होगा. अधिक से अधिक काम भी टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से किया जा सकेगा. यूनिवर्सिटी और कॉलेज में पर्याप्त मात्रा में सैनेटाइजर की व्यवस्था की जाए.

नोडल ऑफिसर हों तैनात

कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए नोडल ऑफिसर तैनात हों. यूनिवर्सिटी कैंपस हो या कॉलेज कहीं भी आने के लिए मास्क लगाना अनिवार्य किया जाए. छात्रों-प्रोफेसर के अलावा यूनिवर्सिटी में काम करने वाले सैनिटेशन वर्कर्स को भी सुरक्षा के उपकरण मुहैया कराए जाएं. उन्हें प्रोटेक्शन किट दी जाए ताकि स्वस्थ्य रहते हुए वो अपनी ड्यूटी निष्ठा के साथ पूरी कर सकें.

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