शिक्षकों की सुरक्षा पर सरकार मौन

दिल्ली नगर निगम के स्कूलों में इन दिनों पढ़ाई नहीं हो रही. इसके बाद भी स्कूल के शिक्षकों की ड्यूटी लगातार लगाई जा रही है. रोजाना निगम शिक्षक स्कूल आते हैं और 6-8 घंटे की ड्यूटी नहीं बल्कि पूरे 11 घंटे की ड्यूटी करके जाते हैं.

दरअसल इन दिनों निगम स्कूलों में दिल्ली सरकार ने सूखा राशन वितरण केन्द्र बनाए हैं. इन स्कूलों में सुरक्षा की कोई सुविधा शिक्षकों के लिए उपलब्ध नहीं है. निगम स्कूलों में आने के बाद भी कई शिक्षक कोरोना संक्रमित हो गए हैं. ऐसे हालातों को देखते हुए शिक्षकों में भय का माहौल है.

शिक्षकों ने मांग की है कि निगम स्कूलों में ज्यादातर 4-5 स्टाफ के लोह हैं. बिना अवकाश लिए सभी लॉकडाउन के बाद से 10 घंटे की ड्यूटी कर रहे हैं. वहीं दिल्ली सरकार की बात करें तो वहां 80-100 शिक्षकों का स्टाफ है. ऐसे में अब जब पूर्ण लॉकडाउन दिल्ली में नहीं है तो सरकार को दिल्ली सरकार के शिक्षक और फूड डिपार्टमेंट के कर्मचारियों से राशन वितरण का काम करवाना चाहिए.

इन दिनों शिक्षकों को ही अनाज तोलने से लेकर इसके वितरण का काम करना पड़ रहा है. ऐसे में शिक्षकों को शारीरिक परेशानी भी उठानी पड़ रही है. प्रशासन ने निवेदन है कि मजदूरों की व्यवस्था की जाए. वहीं नगर निगम शिक्षक संघ के महासचिव रामनिवास सोलंकी ने उत्तरी दिल्ली नगर निगम की आयुक्त वर्षा जोशी को पत्र लिखा है. इसमें उन्होंने शिक्षकों को होने वाली कई परेशानियों का जिक्र किया है.

सोलंकी ने बताया कि राशन वितरण केन्द्र पर एक ही पेन और एक ही स्टैम्प पेड़ है. इसी के जरिए अंगूठा लगवाने का काम किया जाता है. लगातार एक पेन का इस्तेमाल करने से शिक्षकों में कोरोना संक्रमण का भय बना हुआ है. अब पूर्ण लॉकडाउन नहीं है ऐसे में सरकार को शिक्षकों की ड्यूटी खत्म कर उन्हें आराम देना चाहिए. जिनकी ड्यूटी बीते 40 दिनों से नहीं लगी अब उनकी ड्यूटी लगानी चाहिए.

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