जामिया में आया लेटेस्ट स्कैनर, एक सेकेंड से भी कम समय में स्कैन होंगे डॉक्यूमेंट्स

नई दिल्ली. जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने नई उपलब्धि हासिल की है. अब जामिया की डॉ. हुसैन लाइब्रेरी में अत्याधुनिक ओवरहेड स्कैनिंग डिवाइस स्थापित हो गई है. इस डिवाइस से लैस जामिया देश का पहला विश्वविद्यालय बन गया है. फ्रांस में बना यह अत्याधुनिक स्कैनर अभी तक दुनिया के शीर्ष विश्वविद्यालय के पुस्तकालयों तक ही सीमित था.

इस स्कैनर की खासियत है कि ये एक पेज को एक सैकेंड से भी कम समय में स्कैन करता है. इस स्कैनर की मदद से अब जामिया को अपने 100 साल के इतिहास से जुड़े तमाम दस्तावेजों, पुस्तकों और जर्नल को डिजिटल करने में आसानी होगी.

इस डिवाइस के संबंध में जामिया के जनसंपर्क अधिकारी अहमद अज़ीम ने बताया कि जामिया की डॉ. जाकिर हुसैन लाइब्रेरी ने ऑनलाइन टीचिंग लर्निंग रिसर्च को बढ़ावा देने की सुविधाओं को और अधिक उन्नत बनाने के लिए इस मॉडर्न ओवरहेड स्कैनिंग डिवाइस से लैस किया है.

उन्होंने कहा कि इस डिवाइस के आने से कला, इतिहास और संस्कृति के साथ ही विश्वविद्यालय की दुर्लभ पांडुलिपियों एवं अभिलेखीय महत्व के दस्तावेजों के संरक्षण में भी मदद मिलेगी. इस डिवाइस की मदद से कला, इतिहास और संस्कृति के साथ ही विश्वविद्यालय की दुर्लभ पांडुलिपियों और अभिलेखीय महत्व के दस्तावेजों के संरक्षण में भी मदद मिलेगी.

उन्होंने कहा कि इन अति महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक दस्तवेजों के डिजिटल संरक्षण से हमारे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विद्वानों की इन संसाधनों तक पहुंच आसान होने के साथ ही अकादमिक अनुसंधान का दायरा भी बढ़ेगा.

फ्रांस निर्मित है स्कैनर

खास बात है कि फ्रांस में निर्मित यह तेज रफ्तार वाला स्कैनर एक पेज को एक सेकंड से भी कम समय में स्कैन करने की क्षमता रखता है. इसे भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार, केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय की वित्तीय मदद से अर्जित किया गया है. यह अत्याधुनिक स्कैनर दुनिया के शीर्ष विश्वविद्यालयों के पुस्तकालयों में भी स्थापित है.

इस स्कैनर में रियल टाइम कलर प्रीव्यू, ऑटोमैटिक ग्लास ओपनिंग, इलेक्ट्रिकल फ्लैट और वी-शेप्ड बुक क्रैडल, एलईडी कोल्ड लाइटिंग, ऑटोमैटिक क्रॉपिंग, ऑटोमैटिक कर्वेचर करेक्शन जैसे फीचर हैं. भारत के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में डॉ. ज़ाकिर हुसैन लाइब्रेरी पहली है, जिसके पास ऐसी आधुनिक और कुशल डिजिटलीकरण इकाई है.

इस इकाई के स्थापित होने से बड़े पैमाने पर ऐतिहासिक पांडुलिपियों, दुर्लभ पुस्तकों, पुराने धारावाहिकों, अरबी, फ़ारसी, उर्दू और अंग्रेजी भाषाओं में अभिलेखीय अखबारों के चरणबद्ध डिजिटलीकरण करने की योजना है. इन सदियों पुराने दस्तावेजों को डिजिटलाइज़ करने के लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है. लाइब्रेरी, जामिया के इतिहास से जुड़े फोटोग्राफ सहित अन्य प्राइवेट पेपर्स को डिजिटाइज़ करने का भी इरादा है.

साथ ही विश्वविद्यालय के 100 साल के इतिहास से जुड़े पुराने जर्नल्स, मैग्जीन और न्यूज क्लिप्स को डिजिटाइज किया जाएगा. बता दें कि मौजूदा लॉकडाउन के दौरान जामिया की सेंट्रल लाइब्रेरी अपने उपयोगकर्ताओं को उनके घरों और अन्य दूरस्थ स्थानों से, बड़े पैमाने पर अपने ई-संसाधनों तक पहुंच मुहैया करा रही है. 

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