बढ़ता प्रदूषण-जनसंख्या जैव विविधता के लिए है खतरा, जामिया में सेमिनार के दौरान एक्सपर्ट्स ने बताया

नई दिल्ली. जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआई) इन दिनों कोरोना वायरस संक्रमण के दौरान बंद होने के बाद भी ऑनलाइन माध्यम से काफी काम कर रहा है. जामिया का भूगोल विभाग ने इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए एक वेबिनार श्रृंख्ला के तहत कोरोना संक्रमण पर चर्चा की गई.

इस वेबिनार में “कोविड-19 अएपिडेमिक ऑफ मिस्ट्रीटेड बायोडायवर्सिटी” के मुद्दे पर चर्चा की गई. इसमें जेएनयू के स्पेशल सेंटर फॉर डिज़ास्टर रिसर्च के अध्यक्ष, प्रो पी.के. जोशी ने यह विशेष व्याख्यान दिया. इस वेबिनार की शुरूआत भूगोल विभाग के कार्यवाहक प्रमुख प्रो हारुन सज्जाद ने अपना व्याख्यान देकर की.

वेबिनार के दौरान प्रो. जोशी ने जैवविविधता का अर्थ समझाया. उन्होंने आक्रामक प्रजातियों, बढ़ते प्रदूषणों, बढ़ती जनसंख्या और प्रकृति का हद से ज्यादा शोषण करने जैसे पहलुओं की मदद से जैव विविधता के लिए बने खतरे को समझाया. बाद में उन्होंने दुनिया से विभिन्न उदाहरणों को उजागर कर जैव विविधता की अवधारणा, उपयोग और हानि से कोरोना की वर्तमान बनी स्थिति के साथ जोड़ा. जैव विविधता के संरक्षण और उसे बेहाल करने के लिए कई तरीकों भी बताए.

इस व्याख्यान के बाद कई एक्सपर्ट्स, रिसर्चकर्ताओं और छात्रों के सलावों के उन्होंने जवाब भी दिए.

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