मृत्यु के साल भर बाद भी न्याय के इंतजार में हिंदू राव अस्पताल की डॉक्टर

नई दिल्ली. हिंदू राव अस्पताल में छात्रों और कर्मचारियों के साथ होने वाले शोषण पर दिल्ली महिला आयोग संज्ञान ले चुका है. इसी कड़ी में दिल्ली महिला आयोग के सामने एनजीओ किरनदीप की संस्थापक बीना जायसवाल ने बताया कि 2019 में अस्पताल के एनेस्थेसिया विभाग के एक छात्र पर हुई उत्पीड़न की घटना को अनुचित तौर पर दबा दिया गया था. इतना ही नहीं 2019 में शोषण के कारण एक छात्र की भी मौत हो गई थी. इस मामले की जांच भी उचित तरीके से नहीं की गई.

जायसवाल ने कहा कि अस्पताल में बीते साल अल्पसंख्यक समुदाय की एक युवा महिला चिकित्सक की मृत्यु के मामले में भी एक शिकायत समिति का गठन किया गया. मगर समिति ने शिकायतों को दूर करने की जगह उनपर सख्त कार्रवाई नहीं की. नेत्र विभाग की चिकित्सक के अप्राकृतिक मौत के मामले में सीनियर डॉक्टरों के संदेहास्पद रोल को लेकर भी आयोग से हस्तक्षेप करने की मांग की.

संगठन इस संबंध में कई बार अधिकारियों से गुहार लगाई मगर तत्कालीन आयुक्त वर्षा जोशी ने नरमी बरतते हुए अस्पताल प्रशासन के तत्कालीन निदेशक डॉ. अरुण यादव और अस्पताल के तत्कालीन चिकित्सा अधीक्षक ने कोई कार्रवाई नहीं की. मृतक छात्रा को न्याय दिलाने के उद्देश्य से अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाने की मांग उठाई गई. जांच के संबंध में एक भी सरकारी एजेंसी ने इन अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की.

संगठन की संयोजक जायसवाल ने कहा कि अस्पताल में अभिभावक अपने बच्चों को सीखने और डॉक्टर बनाने के लिए भेजते हैं. मगर अस्पताल में अधिकारी व अन्य प्रशासन मेडिकल छात्रों को सुरक्षित वातावरण मुहैया कराने में असफल साबित होते हैं. इसी का नतीजा है कि 2019 में हुई आत्महत्या जैसी घटनाएं घटती है. इन घटनाओं पर रोक लगाने के लिए आयोग व अन्य एजेंसियों को संज्ञान लेना चाहिए और दोषियों को उनके किए की सजा मिलनी चाहिए ताकि ऐसे अपराधों को रोका जा सके.

नियमों को ताक पर रखकर डॉक्टरों का नहीं हुआ तबादला

अस्पताल के नियमों के मुताबिक डॉक्टरों की नियुक्ति के तीन साल बाद तबादला होना चाहिए. मगर हिंदू राव अस्पताल में नियुक्त कई डॉक्टर ऐसे हैं जो बीते कई सालों से हिंदू राव अस्पताल में ही तैनात है. कई डॉक्टर 10-15 सालों से अधिक समय से अस्पताल में तैनात है. कहा जा रहा है कि डॉक्टरों की स्थानीय लैब, केमिस्ट व अन्य मेडिकल संबंधित दुकानों के साथ तगड़ी सांठ गांठ बन गई है. इस संबंध में कई शिकायतें होने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई.

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