जानिए क्या है प्लाज्मा थेरेपी जिससे कोरोना मरीजों का होगा इलाज

कोरोना वायरस का सटीक इलाज अबतक नहीं मिल सका है. देश-दुनिया में कोरोना वायरस के वैक्सीन को लेकर रिसर्च वर्क जारी है. हालांकि इसका इलाज मिलने में अभी वक्त लगेगा. मगर इसी बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बता चुके हैं कि प्लाजमा थेरेपी के जरिए कोरोना का इलाज कराने वाले मरीजों की स्थिति में सुधार हुआ है.

यानी कोरोना के इलाज में प्लाजमा थेरेपी काफी मददगार साबितो हो रही है. इसके बाद से कई राज्यों ने प्लाजमा थेरेपी की इलाज के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए हरी झंडी दिखाई है. अब राज्य सरकारों ने आईसीएमआर यानी की इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च से इसके लिए अनुमति मांगी है.

चलिए आपको बताते हैं कि दरअसल प्लाजमा थेरेपी है क्या और क्यों राज्य इस थेरेपी को शुरू करने के लिए आईसीएमआर से अनुमति मांग रहे हैं और क्या वाकई ये थेरेपी कोरोना वायरस को खत्म करने में कारगर साबित होती है.

दरअसल प्लाजमा थेरेपी में एंटीबॉडी का इस्तेमाल होता है. किसी नए वायरस के खिलाफ बॉडी में एंटीबॉडी तभी बनता है जब इंसान उस बीमारी से पीड़ित हो. जब मरीज संबंधित बीमारी से ठीक हो जाता है तो उसकी बॉडी में एंटीबॉडी बन जाती है.

एक्सपर्ट्स का मानना है कि प्लाज्मा तकनीक काफी पुरानी है, जिसका दशकों से इस्तेमाल हो रहा है. इस तकनीक के तहत जो लोग बीमारी से ठीक हो चुके हैं, उनका प्लाज्मा बीमारी से ग्रसित लोगों में ट्रांसफ्यूज किया जाता है. इस थेरेपी में एंटीबॉडी इस्तेमाल होती है.

जब एंटीबॉडी का असर मरीज पर होता है तो वायरस कमजोर होने लगता है. इसके बाद मरीज के स्वस्थ्य होने की संभावना भी बढ़ जाती है. हालांकि इस इलाज में सतर्कता बरतनी भी जरूरी होती है. ये भी तथ्य नहीं है कि प्लाजमा थेरेपी हर मरीज के उपर सटीकता से काम करे.

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