लोकसभा सांसदों के वेतन में होगी 30 फीसदी की कटौती, बिल को मिली मंजूरी

लोकसभा ने सांसदों के वेतन में एक वर्ष के लिए 30 प्रतिशत कटौती करने के प्रावधान वाले एक विधेयक को मंगलवार को मंजूरी दे दी. इस धनराशि का उपयोग कोविड-19 महामारी के कारण उत्पन्न स्थिति से मुकाबले के लिए किया जाएगा. निचले सदन में संक्षिप्त चर्चा के बाद संसद सदस्य वेतन, भत्ता एवं पेशन संशोधन विधेयक 2020 को धवनिमत से मंजूरी दे दी गई. 

कोरोनावायरस संक्रमण और लॉकडाउन की वजह से 6 अप्रैल को कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी और 7 अप्रैल से इसे लागू कर दिया गया. चर्चा के दौरान सांसदों ने कहा कि उन्हें वेतन कटने पर कोई ऐतराज नहीं है लेकिन सांसद निधि में कटौती पर दोबारा विचार करना चाहिए. दरअसल महामारी को देखते हुए सरकार ने सांसद फंड को 2 साल के लिए निलंबित कर दिया है. यानी दो साल तक सांसदों को उनके इलाके में काम करने के लिए कोई फंड अवलेबल नहीं होगा. लोकसभा में चर्चा के दौरान अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि वह पिछड़े इलाके का प्रतिनिधित्व करते हैं. ऐसे में सांसदों को फंड नहीं मिलने से विकास कार्य प्रभावित हो रहा है.

संसदीय मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने निचले सदन में हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि कोविड-19 के कारण उत्पन्न अभूतपूर्व स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाये हैं. यह कदम उनमें से एक है. उन्होंने कहा कि परोपकार की शुरूआत घर से होती है, ऐसे में संसद के सदस्य यह योगदान दे रहे हैं और यह छोटी या बड़ी राशि का सवाल नहीं है बल्कि भावना का है.

जोशी ने कहा कि प्राकृतिक आपदा आती है तब एक विशिष्ट क्षेत्र को प्रभावित करती है, युद्ध दो देशों की सीमाओं को प्रभावित करता है. लेकिन कोविड-19 ने पूरे विश्व को प्रभावित किया है, दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है. उन्होंने कहा कि सरकार ने 20 लाख करोड़ रूपये के पैकेज के साथ ही 1.76 लाख करोड़ रुपए की गरीब कल्याण योजना की शुरूआत की. सरकार ने मनरेगा का आवंटन बढ़ाया और ग्रामीण आधारभूत ढांचे के लिये काम किया .

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