Unexpected : पुरस्कार से नहीं वेतन से चलता है घर, निगम शिक्षकों ने पुरस्कार वापस करने का किया एलान

नई दिल्ली. जब किसी व्यक्ति को पुरस्कार मिलता है तो वो एक खुशी का लम्हा होता है. पुरस्कार के जरिए व्यक्ति की मेहनत को दर्शाते हैं. मगर अगर कोई व्यक्ति अपना जीता हुआ पुरस्कार ही सरकार या प्रशासन को वापस कर दे तो इसके पीछे उस व्यक्ति की मनोस्थिति क्या होगी इसका अंदाजा लगा पाना कठिन है.

ऐसा ही कुछ अब उत्तरी दिल्ली नगर निगम के शिक्षकों ने भी करने की ठानी है. हर साल शिक्षक दिवस के मौके पर शिक्षकों को पुरस्कृत किया जाता है. मगर उत्तरी दिल्ली नगर निगम के शिक्षकों ने निगम और क्षेत्रीय पुरस्कारों को वापस करने का फैसला किया है.

दरअसल उत्तरी दिल्ली नगर निगम में कार्यरत शिक्षकों को बीते 3 महीनों से वेतन नहीं मिला है. शिक्षक निगम प्रशासन और दिल्ली सरकार से लगातार वेतन जारी करने की गुहार कर रहे हैं.

शिक्षकों का कहना है वेतन के अलावा सातवें वेतन आयोग का एरियर बीते चार सालों से शिक्षकों को नहीं मिला है. इसके अलावा MACP एरियर के बिलों का भुगतान पिछले दस वर्षों से नहीं किया गया है.

शिक्षकों के LTC बिल सालों से लंबित पड़े हैं. बच्चों के शिक्षण भत्तों के बिलों का भुगतान पिछले पाँचे वर्षों से बकाया है. मेडिकल बिलों का भुगतान पिछले कई सालों से नहीं हुआ है.

एक जून से अनशन

नगर निगम शिक्षक संघ के महासचिव रामनिवास सोलंकी का कहना है कि अगर सरकार और निगम प्रशासन ने शिक्षकों की मांगों पर गौर नहीं किया तो शिक्षक एक तारीख को अपने पुरस्कार महापौर को लौटाएंगे.

उन्होंने बताया कि मांगे पूरी नहीं होने की स्थिति में उत्तरी दिल्ली नगर निगम के शिक्षकों के प्रतिनिधि के रूप में मुख्यमंत्री निवास स्थान पर आमरण अनशन करेंगे.

शिक्षकों का कहना है कि निगम के शिक्षक कई सालों से मानसिक और शारीरिक यातनाएं झेल रहे हैं. इस संबंध में कई बार मुख्यमंत्री, महापौर, आयुक्त को जानकारी दी गई मगर किसी ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की.

आपको बता दें कि कोरोना वायरस संक्रमण के बीच इन दिनों उत्तरी दिल्ली नगर निगम के शिक्षक लगातार 12 घंटों तक कोरोना संक्रमण से लड़ते हुए जनता के बीच सूखा राशन व खाना वितरण  का काम लगातार कर रहे हैं.

लॉकडाउन के बाद से बिना किसी छुट्टी के निगम शिक्षकों ने अपनी ड्यूटी की है. मगर सरकार को शिक्षकों की मांगों पर गौर करने का समय ही नहीं है.

आपको बता दें कि निगम के शिक्षक इन दिनों कोरोना संक्रमण के बीच लगातार ही 12-12 घंटे तक कोरोना संक्रमण के बीच ड्यूटी कर रहे हैं. सरकार और निगम की ओर से शिक्षकों के लिए न ही मास्क, ग्लव्स औ न ही पीपीई किट्स की व्यवस्था की गई है.

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