निगम के शिक्षक शारीरिक-मानसिक पीड़ा से परेशान, कई महीनों से वेतन का इंतजार

नई दिल्ली. कोरोना वायरस के कारण एक तरफ जहां स्कूलों व कॉलेजों में छुट्टियां घोषित की गई है. वहीं दूसरी तरफ दिल्ली नगर निगम के स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की परेशानी और अधिक बढ़ गई है.

उत्तरी दिल्ली नगर निगम में आर्थिक संकट के कारण निगम में कार्यरत शिक्षकों को फरवरी, मार्च और अप्रैल महीने का वेतन अबतक नहीं मिला है. तीन महीनों तक लगातार बिना वेतन के काम करने को मजबूर शिक्षकों की स्थिति अब दयनीय होती जा रही है. बिना वेतन शिक्षकों के घरों में अब चूल्हा जलाने के भी लाले पड़ने लगे हैं.

शिक्षकों से जुड़ी इस गंभीर समस्या पर नगर निगम शिक्षक संघ के महासचिव रामनिवास सोलंकी ने बताया की संघ ने अपनी परेशानी मेयर, निगम आयुक्त, उप मुख्यमंत्री जो राज्य के शिक्षा मंत्री भी हैं, मुख्यमंत्री, उपराज्यपाल, प्रधानमंत्री सभी के सामने पत्र लिखकर रखी. दिल्ली के हजारों शिक्षकों और उनके परिवार वालों से जुड़ी इस समस्या पर किसी का ध्यान नहीं है.

गौरतलब है कि दिल्ली की नगर निगमों जिसमें उत्तरी दिल्ली नगर निगम भी शामिल है, इनकी वित्तीय हालत बेहद खराब है. निगम और दिल्ली सरकार के बीच जारी खिंचतान के कारण निगम के शिक्षकों में रोष उत्पन्न होने लगा है.

शिक्षकों का हो रहा मानसिक शोषण

बीते तीन महीनों से वेतन नहीं मिलने के कारण शिक्षक इस समय परेशान हैं. निगम में स्कूलों की छुट्टी के बाद भी दिल्ली में लॉकडाउन के दौरान राशन बांटने के लिए शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है.

इन दिनों शिक्षकों को आम दिनों से कहीं अधिक यानी सुबह 8 बजे से शाम के 6 बजे तक ड्यूटी करनी पड़ रही है. एक तरफ जहां कोरोना महामारी के कारण लोग घटों में सुरक्षित हैं वहीं निगम के शिक्षक अपनी जान की परवाह किए बीना अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं. निगम के लगभग आठ हजार शिक्षक हैं जो इस समय बदहाली में जिंदगी गुजार रहे हैं.

संघ के सचिव आशु शर्मा ने बताया कि सभी शिक्षक बिना वेतन इस महामारी में सुबह से शाम तक 10 -10 घंटे लगातार बिना साप्ताहिक अवकाश के निगम स्कूलों में राशन एवं पका भोजन बाँट रहे है और BLO बन कर कोरोना के बचाव की जानकारी और सर्वे का कार्य कर रहे है.

स्कूलों में चल रहे राहत शिविर कैंप में भी शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है. इसी के साथ ऑनलाइन माध्यम से निगम के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को पढ़ाया जा रहा है. ये सभी काम शिक्षक बिना वेतन के कर रहे हैं.

इतने काम करवा कर और वेतन का भुगतान न कर निगम व दिल्ली सरकार दोनों मिलकर शिक्षकों को परेशान कर रही है. शिक्षकों की परेशानी की सुनवाई करने के लिए भी कोई तैयार नहीं है.

बीमा दायरे से बाहर शिक्षक

गौरतलब है कि दिल्ली नगर निगम के कर्मियों को कोरोना बीमा की सुविधा दी गई थी. मगर कोरोना बीमा के दायरे से शिक्षकों को बाहर कर दिया गया.

निगम के शिक्षक जो इस समय सड़कों पर घूम रहे हैं और अपनी ड्यूटी कर रहे हैं उनके लिए किसी तरह के सुरक्षा उपकरण भी मुहैया नहीं कराए गए हैं. न ही शिक्षकों को मास्क दिया गया न ग्लव्स.

शिक्षकों का कहना है कि सरकार और निगम न वेतन दे रहे हैं न बीमा में शामिल कर रहे हैं. शिक्षकों को साप्ताहिक अवकाश भी नहीं मिल रहा. शिक्षकों ने कहा है कि अगर निगम और सरकार उनकी मांगों पर गौर नहीं करती तो शिक्षक इस काम का बहिष्कार करने को मजबूर होंगे.

शिक्षक संघ ने अपील की है कि शिक्षकों को वेतन का भुगतान किया जाए. साथ ही राशन बांटने का समय भी कम किया जाए जाति शिक्षक जो खुद भी कोरोना वॉरियर हैं, उनका मनोबल बढ़ सके.

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