4.2 लाख करोड़ का कर्ज लेगी मोदी सरकार, हुआ फैसला

केंद्र सरकार ने 4.2 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लेने की घोषणा की है. कोरोना संक्रमण के बीच लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से ये महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. इससे पहले इस साल के बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कर्ज की रकम 7.8 लाख करोड़ बतायी थी. अब सरकार जब नया कर्ज लेगी तो कर्ज की कुल रकम बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच जाएगी.

बढ़ गया घाटा

सरकार ने कर्ज लेने का फैसला तो कर लिया, मगर इसकी वजह से राष्ट्रीय कोष घाटा भी बढ़ गया है. 5.5 फीसदी से बढ़कर 6 फीसदी पर पहुंच जाएगा. हालांकि बजट भाषण में इस घाटे का अनुमान असल से काफी कम यानी मात्र 3.5 फीसदी तक आंका गया था. बता दें कि पूरे बजट रकम और आमदनी के बीच के अंतर को ही राष्ट्रीय कोष घाटा कहते हैं.

सरकार के फैसले के कारण अचानक बढ़ रहा घाटा आम आदमी के लिए चिंताजनक स्थिति उत्पन्न कर सकता है. मार्च 2020 तक भी सरकार इस बात पर अड़ी थी कि कर्ज लेने की आवश्यकता नहीं है. लेकिन कोरोना वायरस ने आकर सरकार की बाजी पलट दी.

कोरोना वायरस के कारण जो हालात उत्पन्न हो रहे हैं उसकी वजह से सरकार को भारी नुकसान हुआ है. इस कर्ज को लेने के बाद राष्ट्रीय कोष घाटा उस सीमा को तोड़ देगा जिसका आंकलन बजट भाषण में हुआ था.

बीते दिनों रिज़र्व बैंक ने स्टेट बैंक को काफी कर्ज दिया है, लेकिन बैंक में कर्ज लेने के लिए लोग नहीं आ रहे हैं. जो पैसा बाजार में है वो सरकार के कर्ज में डाला जाएगा. सरकार के इस कर्ज लेने के फैसले से आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का भारत के प्रति नजरिये को भी दिखाएगा.

कोरोना वायरस महामारी के वजह से सरकार को जितना खर्च करना था वो नहीं कर सके, क्योंकि 24 मार्च से ही देशभर में लॉकडाउन जारी है. इस समय सरकार के लिए खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है क्योंकि लॉकडाउन के कारण आमदनी नहीं हो रही.

ऐसे में सरकार खर्च लेने की ओर कदम बढ़ा रही है. सरकार आमतौर पर बिजली, पानी, पेट्रोल आदि से पैसा कमाती है. लेकिन लॉकडाउन के कारण इससे कमाई नहीं हो पा रही है. सरकार के पास जब आमदनी नहीं आई तो कर्ज का रास्ता चुनना पड़ा.

एक्सपर्ट्स की मानें तो कोरोना वायरस संक्रमण हाल ही में खत्म होने वाला नहीं है. कई एक्सपर्ट्स इस बात को दोहरा चुके हैं. ऐसे में केंद्र सरकार लंबी अवधि के लिए कर्च लेकर काम चलाने की कोशिश करेगी.

सरकार के हर फैसला का असर सीधा आम आदमी पर होता है. वैसे ही इस फैसले से भी आम आदमी पर असर पड़ेगा. पहला तो यह है कि आम आदमी को कर्ज मिलने में दिक्कत होगी क्योंकि बैंक सरकार को कर्ज पहले देने का सोचेगी. इसका कारण सुरक्षा की गारंटी हो सकता है. दूसरा रिज़र्व बैंक ने अगर पैसा बाजार में पेश किया तो महंगाई बढने का खतरा है जिसका कारण पूंजी ज्यादा और सामन का उत्पादन कम है.

Anjali Kumari

Aspiring news reporter and radio jockey.

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