नॉर्थ एमसीडी ने दिए अजीब ऑर्डर, डॉक्टरों को कोरोना मरीजों की देखभाल करने के लिए यूट्यूब से वीडियो के जरिए सीखने को कहा

इस समय कोरोना से निपटने के लिए सरकारों से लेकर डॉक्टर अपनी पूरी कोशिशों में लगे हुए है. सरकार और प्रशासन जहां सही ढंग से ऑर्डर पास कर रही हैं. इसके बाद भी उत्तरी दिल्ली नगर निगम कोरोना के प्रकोप से निपटने में ज्यादा गंभीरता नहीं दिखा रही है.

एक तरफ जहां साफ सफाई का ध्यान नहीं रखा जा रहा है. वहीं अब नॉर्थ एमसीडी के आला अधिकारियों ने अस्पताल के डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के लिए ऐसे आदेश जारी कर दिए हैं जिन्हें पढ़कर चिकित्सा व्यवस्था पर कई तरह से सवाल खड़ें हो जाएंगे.

दिल्ली की जनता की जान के साथ नॉर्थ एमसीडी किस तरह से मजाक कर रहा है, उसका एक ताजा उदाहरण इसके एक ईमेल में देखने को मिला. नॉर्थ एमसीडी डीएचए की ओर से निगम के अन्य स्वास्थ्य अधिकारियों और अस्पताल अधिक्षको किए गए ईमेल किया गया है.

इस ईमेल में लिखा है कि कोरोना मरीजों के लिए तैयार किए गए इंटूबेशन सेंटर में मरीजों की देखभाल की ट्रेनिंग यूट्यूब से लें. यहां खास बात है कि इंटूबेशन सेंटर में मरीजों को सांस लेने के लिए खास तकनीक का इस्तेमाल होता है. यही तकनीक यूट्यूब से सीखने के ऑर्डर जारी किए गए हैं.

एक तरफ लोग इस बीमारी से खुद को बचाने के लिए लगातार घरों में बंद हैं. लॉकडाउन का पालन कर रहे हैं. इसके बावजूद भी एमसीडी ऐसे बचकाने ऑर्डर पास करने से बाज नहीं आ रही है. निगम के इस ऑर्डर के बाद साफ जाहिर होता है कि निगम के अस्पतालों में भर्ती कोरोना के मरीजों की देखभाल कितनी गंभीरता के साथ की जा रही है.

ऐसे आपातकाल के समय में जब लोग डॉक्टरों पर सबसे ज्यादा भरोसा कर रहे हैं, उन्हें भगवान का दूसरा रूप मान रहे हैं. वहीं इतने गंभीर माहौल में इस तरह के ऑर्डर पास करना लोगों की जिंदगी के खिलवाड़ करने के अलावा और कुछ नहीं है.

इन्हें मिले हैं ऑर्डर

आपको बता दें कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम के डीएचए ऑफिस से ये ईमेल भेजा गया है. इसे एडिशनल डीएचए, कस्तूरबा गांधी अस्पताल, समेत कई बड़े अधिकारियों को भेजा गया है.

क्या होता है इंटूबेशन सेंटर

इंटूबेशन सेंटर में डॉक्टर मरीजों की देखभाल करते हैं जिन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है. ये तकलीफ किसी सर्जरी, बीमारी या आकस्मिक कारणों से हो सकती है. वहीं अगर कोरोना के मरीजों के संदर्भ में बात करें तो इंटूबेशन तकनीक के जरिए मरीज को सांस पहुंचाना सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है.

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