तीन घंटे तक चली पीएम मोदी और मुख्यमंत्रियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, जाने किन बातों पर हुई चर्चा

नई दिल्ली. कोरोना वायरस महामारी का असर कई महीनों तक रहेगा. आने वाले समय में केंद्र और राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है कि वो इस महामारी से लड़े. इसी के साथ कोरोना वायरस के कारण रूकी हुई अर्थव्यवस्था को दोबारा सक्रिय करने के लिए भी कदम उठाए. ये कहना है देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) का.

ये बातें उन्होंने सोमवार को राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कहीं. इस दौरान गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन (Dr. Harshvardhan) भी मौजूद रहे.

चेहरे पर मास्क पहने और रूम में भी दो फीट की दूरी पर बैठने जैसे उपाय करते हुए पीएम ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में हिस्सा लिया. उन्होंने कहा कि हमें रोजाना की जिंदगी में भी मास्क लगाने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने जैसी आदत बना लेनी चाहिए.

देश में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो इसे देखते हुए लॉकडाउन को दो बार बढ़ा चुके हैं, जिसके नतीजे अच्छे आए हैं. शुरुआत से ही इन उपायों को अपनाने का कारण लाखों लोगों की जिंदगी की सुरक्षा हो पाई. खासतौर से भारत जैसे अधिक आबादी वाले देश में सही समय पर कदम उठाना काफी प्रभावशाली रहा. आज भारत की स्थिति उन देशों से भी बेहतर है जहां मार्च में भारत जैसे हालात थे.

खतरा कम नहीं हुआ

लॉकडाउन प्रभावशाली जरूर रहा, मगर कोरोना का खतरा अबतक खत्म नहीं हुआ है. पीएम ने आगाह करते हुए कहा कि हर स्तर पर कोरोना को लेकर जागरूकता फैलाने की जरूरत पड़ेगी. एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि कोरोना आने वाले कई महीनों तक अरना असर दिखाएगा.

लॉकडाउन पर हुई चर्चा

गौरतलब है कि 3 मई को देश भर में लगा लॉकडाउन हटाया जाएगा. मगर इससे सिर्फ कुछ ही दिन पहले पीएम की ये बैठक हुई है. इस बैठक में चर्चा हुई कि लॉकडाउन की अवधि पूरी होने के बाद इसे कैसे और किस सीमा तक हटाया जाए.

इसी के साथ पीएम ने राज्यों को कहा कि रेड जोन वाले इलाकों में लगातार प्रतिबंध को जारी रखें और संबंधित दिशा निर्देशों का भी पालन करें. उन्होंने कहा कि हर दिन हमारा यही प्रयास होना चाहिए कि रेड जोन को ऑरेंज जोन बनाएं और फिर उसे ग्रीन में तब्दील करें. यानी अधिक प्रभावित क्षेत्रों को आंशिक प्रभावित और फिर सुरक्षित बनाया जाए.

नए शोध करने के लिए किया प्रोत्साहित

वहीं कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में उन्होंने यूनिवर्सिटी और इंस्टीट्यूट की भूमिका पर भी बात की. उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी में इस महामारी से लड़ने के उद्देश्य से नए नए शोध होने चाहिए, ताकि हमें कोरोना से मुक्ति का रास्ता मिल सके और हम बाकी देशों की मदद भी कर सकें. इसी के साथ उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कई बीमारियां पैदा होंगी, क्योंकि मौसम में बदलाव होने वाला है. इसके लिए भी कोरोना के साथ ही खास रणनीति तैयार करनी होगी.

पहले भी कर चुके हैं बात

ये पहला मौका नहीं है जब पीएम मोदी ने मुख्यमंत्रियों के साथ बात की है. इससे पहले 20 मार्च, 2 अप्रैल और 11 अप्रैल को भी वो मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ चुके हैं.

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