एनजीटी ने विशाखापत्तनम गैस लीक मामले का संज्ञान लिया, कई को नोटिस

नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने विशाखापत्तनम में एलजी पालीमर्स इंडस्ट्री से स्टाइरीन गैस के लीक होने के मामले पर स्वत: संज्ञान लिया है. एनजीटी चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली बेंच ने आंध्रप्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, विशाखापत्तनम के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय और एलजी पालीमर्स को नोटिस जारी किया है. इस मामले पर अगली सुनवाई 18 मई को होगी.

एनजीटी ने लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई के लिए एलजी पालीमर्स को 50 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. एनजीटी ने एक पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया है जो इस घटना पर रिपोर्ट देगा. इस कमेटी में आंध्रप्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस बी सेशैयाना रेड्डी, आंध्र युनिवर्सिटी, विशाखापतनम के पूर्व कुलपति प्रो वी. रामचंद्र मूर्ति, आंध्र यूनिवर्सिटी के केमिकल इंजीनियरिंग के विभागाध्यक्ष प्रो. पुलिपति किंग, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव, सीएसआईआर-इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी और नीरी विशाखापत्तनम के प्रमुख शामिल हैं. एनजीटी ने इस कमेटी से 18 मई तक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है.

एनजीटी ने कमेटी को निर्देश दिया है कि वो जितनी जल्दी हो मौके का मुआयना करे और रिपोर्ट दे. एनजीटी ने कमेटी को निर्देश दिया है कि वो रिपोर्ट में घटनाक्रम, घटना की वजह और उसके लिए जिम्मेदार एजेंसियां और लोगों की जानाकारी दे. एनजीटी ने कहा है कि रिपोर्ट में जानमाल को हुए नुकसान के अलावा गैस के लीक होने से लोगों के स्वास्थ्य पर होने वाले प्रभाव का भी आकलन करें. एनजीटी ने कमेटी को इस घटना के पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों और संपत्ति और पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजे का आकलन करे. एनजीटी ने कमेटी को निर्देश दिया है कि वो ऐसी घटना को रोकने के लिए उठाए गए कदमों की भी जानकारी रिपोर्ट में दें.

उल्लेखनीय है कि इस घटना की न्यायिक जांच की मांग करनेवाली एक याचिका भी एनजीटी में दायर की गई है. याचिका सीवेल फाउंडेशन की ओर से बनू बंसल ने दायर किया है. याचिकाकर्ता की ओर से वकील गौरव बंसल ने कहा है कि विशाखापत्तनम में हुए गैस लीक कांड की रिटायर्ड जज क अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय कमेटी द्वारा कराने का दिशानिर्देश जारी किया जाए.

याचिका में कहा गया है कि गैस लीक होने की वजह से सबसे ज्यादा प्रभावित बच्चे हुए हैं. अभी तक गैस के लीक होने की वजह से सौ लोगों से ज्यादा लोग बीमार हो गए हैं और करीब पांच जिलों के लोग प्रभावित हुए हैं. गैस के लीक होने की वजह से फसलों पर भी असर पड़ा है. कई लावारिस जानवरों की भी मौत हो गई है. याचिका में कहा गया है कि औद्योगिक ईकाई ने कानून के मुताबिक काम नहीं किया. याचिका में गैस के लीक होने को जानबूझकर की गई लापरवाही बताया गया है.

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