मोहल्ला क्लीनिक में नहीं है पैरासिटामोल, बाहर से दवाई लेने को मजबूर मरीज

मामूली बुखार और हल्के सिर दर्द की समस्या होने पर आमतौर पर भारत में लोग बिना सोचे समझे पैरासिटामोल दवाई खाते हैं. कई बार तो डॉक्टर की सलाह लिए बिना भी पैरासिटामोल दवाई खा लेते हैं. ये भारत में मिलने वाली सबसे आम दवाईयों में से एक है.

अधिकतर छोटी मोटी दवाइयों के लिए डॉक्टर पैरासिटामोल की डोज देते हैं, जिसे खाने के बाद मरीज का स्वास्थ्य भी ठीक हो जाता है. ये कहना गलत नहीं होगा कि पैरासिटामोल भारत में इस्तेमाल होने वाली सबसे प्रमुख दवाइयों में से एक है.

मगर देश की राजधानी दिल्ली में जनता की सहूलियत के लिए बनाए गए मोहल्ला क्लीनिकों में पैरासिटामोल उपलब्ध नहीं है. एक ऐसी दवाई जो आमतौर पर कई मरीजों को अलग अलग बीमारियों और कंडिशंस देख कर दी जाती है.

मगर विश्व स्तर पर दिल्ली की पहचान बना चुके मोहल्ला क्लीनिक में ये आम दवा जनता के लिए उपलब्ध नहीं है. अगर आंकडों की मानें तो एक दिन 100 मरीज मोहल्ला क्लीनिक आते हैं. इनमें से कम से कम 30 को सामान्यत: पैरासिटामोल दवाई दी जाती है.

ब्रुफीन बनी विकल्प

मोहल्ला क्लीनिकों में पैरासिटामोल की जगह अब डॉक्टर ब्रुफीन देने को मजबूर हैं. बीते 6 महीनों से मोहल्ला क्लीनिक में पैरासिटामोल की सप्लाई नहीं की गई है. ऐसे में डॉक्टर पैरासिटामोल की जगह अब ब्रुफीन दवाई मरीजों को दे रहे हैं. हालांकि इससे डॉक्टर काफी परेशान है.

अगर वो मरीज को पैरासिटामोल लिखकर देते हैं तो मरीज को दवाई बाहर से खरीदनी पड़ रही है. जबकि आमतौर पर मोहल्ला क्लीनिक से दवाई मुफ्त में मिलती है, मगर दवाई न होने के कारण मरीजों पर आर्थिक जोर भी पड़ रहा है.

गौरतलब है कि इस समय कोरोना वायरस के कारण दिल्ली के सभी बड़े अस्पतालों को कोरोना मरीजों का इलाज करने के लिए चयनित किया गया है. ऐसे में आम जनता बीमारी के कारण अस्पताल में नहीं जा पा रही है. यही वजह है कि इन दिनों दिल्ली सरकार द्वारा चलाए जा रहे मोहल्ला क्लीनिक में मरीजों की भीड़ होने लगी है.

बढ़ रही क्लीनिक में भीड़

मोहल्ला क्लीनिक में सैंकड़ों की संख्या में रोजाना मरीज पहुंच रहे हैं. दरअसल दिल्ली के बड़े अस्पताल कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए बना दिए गए हैं. ऐसे में मरीज भी अस्पताल में जाने से बच रहे हैं. इस कारण ज्यादातर मरीज अस्पतालों की जगह दिल्ली सरकार के मोहल्ला क्लीनिक में जा रहे हैं. इस समय सर्दी, जुकाम, बुखार से लेकर हर बीमारी के लिए लोग सीधा मोहल्ला क्लीनिक का ही रुख कर रहे हैं.

राशन वितरण का प्रचार

दिल्ली सरकार लगातार अपने राशन वितरण कार्यक्रम का जोरशोर से प्रचार-प्रसार कर रही है. मगर दवाईयों की कमी पर सरकार का ध्यान नहीं गया है.

मोहल्ला क्लीनिक में खत्म हो रहीं दवाईयों के कारण इस समय मरीजों के पास इलाज करवाने के लिए कोई अन्य विकल्प भी मौजूद नहीं है. ऐसे में मरीजों को इन दिनों परेशान होना पड़ रहा है.

2015 से शुरु हुए

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सरकार ने 2015से मोहल्ला क्लीनिक प्रोग्राम को शुरू किया था. सरकार ने बीते 5 सालों के अपने कार्यकाल में 300 से भी ज्यादा मोहल्ला क्लीनिक पूरी राजधानी में खोले हैं. हालांकि सरकार का वादा था कि इस दौरान 1000 से ज्यादा मोहल्ला क्लीनिक खोले जाएंगे.

रविवार को बंद होता है क्लीनिक

मोहल्ला क्लीनिक रविवार को छोड़कर सभी दिन खुले रहते हैं. सभी मरीजों को बुनियादी सुविधाएं मोहल्ला क्लीनिक में मिलती हैं. यहां बुखार, डायरिया और चर्म रोग संबंधित बीमारियों का इलाज होता है. मोहल्ला क्लीनिक में 212 तरह के टेस्ट की सुविधा भी है. यहां मरीजों को दवाएं भी मुफ्त दी जाती हैं.

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