भूख हड़ताल भी नहीं आई काम, निगम शिक्षकों को अब भी वेतन का इंतजार

नई दिल्ली. भूख हड़ताल, मुख्यमंत्री को पत्र, उपराज्यपाल का दरवाजा खटखटाना या फिर कोर्ट में अपील. हर वो जगह हर वो व्यक्ति जिससे उम्मीद की किरण जगी थी, सभी को पत्र लिखे मगर अबतक वेतन का इंतजार ही है. यहां बात हो रही है उत्तरी दिल्ली नगर निगम के शिक्षकों की. शिक्षकों को बीते तीन महीनों से वेतन नहीं दिया गया है. मार्च से शिक्षक वेतन के इंतजार में बैठे हैं. मगर अबतक शिक्षकों को वेतन नहीं मिला है. कोरोना संक्रमण काल में लगातार कोरोना वॉरियर्स की तरह काम करने वाले निगम के शिक्षक निगम अधिकारियों की बेरुखी से परेशान हो गए हैं.

इस संबंध में उच्च न्यायालय ने बृहस्तपतिवार को उत्तरी दिल्ली नगर निगम को एक सप्ताह के भीतर ही अपने शिक्षकों के बकाया वेतन का भुगतान करने के आदेश जारी किए हैं. लॉकडाउन लागू होने के बाद से ही शिक्षक वेतन की राह देख रहे हैं. उच्च न्यायालय ने निगम को फटकार लगाते हुए कहा कि शिक्षकों को वेतन मांगने के लिए दर दर भटकने पर मजबूर नहीं किया जा सकता.

इस संबंध में शिक्षक न्याय मंच नगर निगम के कुलदीप खत्री ने बयाया कि नौ दिनों की भूख हड़ताल के बाद शिक्षकों के कहने पर हड़ताल को खत्म किया. मगर निगम से लेकर दिल्ली सरकार किसी को भी हड़ताल से या शिक्षकों की दयनीय और बिगड़ती आर्थिक स्थिति से कोई फर्क नहीं पड़ा है. निगम ने अबतक शिक्षकों के वेतन के संबंध में कोई आदेश जारी नहीं किया है. दिल्ली सरकार और निगम के नेता आपसी राजनीति में बेकसूर शिक्षकों को न सिर्फ आर्थिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी परेशान कर रहे हैं.

दिल्ली सरकार के अधीन हो जाए निगम

वेतन की मांग को लेकर अब हर स्कूल में रोजाना एक शिक्षक हड़ताल कर रहा है ताकि शिक्षकों को समय पस वेतन मिले. उन्होंने कहा कि वेतन का मुद्दा कोई आज पहली बार नहीं उठा है. अगर निगम वेतन देने में असमर्थ है और इनके पास संसाधनों की कमी है तो निगम दिल्ली सरकार के साथ मिल जाए ताकि हमारे वेतन की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार के उपर आ जाए. अभी वर्तमान परिदृश्य में निगम और दिल्ली सरकार के बीच होने वाले राजनीति का सीधा शिकार शिक्षकों को होना पड़ता है.

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