#One_Nation_One_Stipend की मांग के साथ सोशल मीडिया पर डॉक्टरों का प्रदर्शन

इस समय कोरोना वायरस के प्रकोप से निपटने में पूरे देश की मेडिकल फ्रेटर्निटी लगी हुई है. देश का हर डॉक्टर, नर्स से लेकर अन्य स्टाफ भी कोरोना वायरस के मरीजों का इलाज कर उन्हें ठीक करने की जुगत में लगे हुए हैं.

इस कमजोर समय में जब देश के हजारों लाखों डॉक्टर खुद अपनी समस्या से जूझ रहे है, देश की सेवा में फ्रंटलाइन में काम कर रहे हैं. देश के कई इंटर्न डॉक्टर कम स्टाइपेंड की समस्या से परेशान है.

देश में इंटर्न डॉक्टरों को कई राज्यों में एक मजदूर से भी कम स्टाइपेंड पर काम करने पर मजबूर किया जाता है. लाखों रुपये मेडिकल की पढ़ाई पर खर्च करने के बाद भी उन्हें स्टाइपेंड के नाम पर ऐसी राशि मिलती है जिसमें एक कमरे का किराया निकालना भी मुश्किल हो.

ये न सिर्फ सरकार के लिए बल्कि मेडिकल फ्रेटर्निटी के लोगों के लिए भी शर्मनाक है कि एक इंटर्न डॉक्टर जो आगे चलकर लोगों की जान बचाने का काम करेगा. उसका वेतन मात्र 7 हजार रूपये है. एक तरफ तो डॉक्टर पूरी शिद्दत और लगन के साथ अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं. वहीं स्टाइपेंड के नाम पर उन्हें इतने कम पैसे मिलना कि वो एक सम्मानजनक जिंदगी भी न जी सकें, ये बेहद शर्मनाक है.

राजस्थान-उत्तर प्रदेश में कम वेतन

कांग्रेस शासित राजस्थान की बात करें तो राज्य के अलग अलग अस्पतालों में ड्यूटी करने वाले इंटर्न डॉक्टरों को राज्य सरकार से मात्र 233 रूपये का स्टाइपेंड रोजाना मिलता है. संकट के इस समय में भी डॉक्टर रोजाना 10-12 घंटों तक ड्यूटी करते हैं. मगर सरकार डॉक्टरों की समस्या पर बिलकुल संवेदनशील नहीं है.

डॉक्टरों की दु्र्दशा करने के मामले में बीजेपी भी पीछे नहीं है. बीजेपी शासित उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहां भी इंटर्न डॉक्टरों की स्थिति बदहाल ही है. दिन भर काम करने वाले इंटर्न डॉक्टर को एक दिन में 250 रूपये का भुगतान किया जाता है. यानी महीने के अंत में हाथ में आते हैं 7500 रुपये.

TheDepth ने उठाया है मुद्दा

TheDepth डॉक्टरों के वेतन के मुद्दे को कई बार उठा चुका है. पहले भी हमने इंटर्न डॉक्टरों को मिलने वाले स्टाइपेंड के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है. डॉक्टरों के स्टाइपेंड के संबंध में कई बार सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया है. सरकार मामले पर उदासीन है. उत्तर प्रदेश एयर राजस्थान के मुद्दे आये थी सामने

सोशल मीडिया पर कर रहा ट्रेंड

वहीं अब इस मांग पर सोशल मीडिया पर भी मांग उठने लगी है. ट्वीटर पर 85 हजार से भी ज्यादा ट्वीट के साथ #One_Nation_One_Stipend टॉप में ट्रेंड कर रहा है. इसके जरिए देश भर के डॉक्टर एकजुट होकर मांग कर रहे हैं कि देश के हर डॉक्टर को एक्सपीरियंस के आधार पर हर राज्य में समान स्टाइपेंड दिया जाए. राज्य सरकारों के कारण डॉक्टरों के बीच हो रहे इस भेदभाव को खत्म किया जाए.

URDA ने उठाया मु्द्दा

डॉक्टरों की यूनाइटेड रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन (URDA) ने भी इस मुद्दे को कई बार उठाया है. URDA का कहन है कि ये अच्छा कदम है कि देश के इंटर्न इस मामले पर एकजुट हुए हैं. अब सरकार को भी इस मामले की गंभीरता समझते हुए इस मुद्दो को सुलझाना चाहिए और #One_Nation_One_Stipend लागू करना चाहिए.

सेना के लिए OROP

इस समय देश में सेना के लिए भी #One_Rank_One_Pension रूल लागू होता है. इसके जरिए देश के हर सैनिक जो समान रैंक पर है उन्हें एक ही पेंशन दी जाएगी. सैनिकों ने अपने हक के लिए सालों तक लड़ाई की और सरकार ने इस मांग को पूरी किया

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