लॉकडाउन में न हो परेशान, इधर भी दें ध्यान

लॉकडाउन के दौरान हर समय घर में कैद रहना भी काफी मुश्किल काम है. न घर से बाहर जा सकते है न ही कोई काम कर सकते हैं. घर में अधिक समय तक रहकर भी काफी बोरियत होने लगी है.

मगर आज के समय में इस बात पर गौर करना भी जरूरी है कि लॉकडाउन के दौरान जहां हमारे कोरोना वॉरियर्स यानी डॉक्टर मरीजों का इलाज अस्पताल में कर रहे हैं, वहीं हमारी प्रकृति खुद का इलाज कर रही है. हमारी पृथ्वी का इलाज कर रही है.

लॉकडाउन के कारण सड़कों पर गाड़ियों की आवाजाही कम है जिसकी वजह से प्रदूषण कम है, विजिबिलिटी इस हद तक साफ हुई है कि जालंधर से हिमालय के पहाड़ तक दिखने लगे हैं. जिन लोगों को श्वसन संंबंधी समस्याएँ थी वो एकाएक कम हो गई है.

लॉकडाउन के इस पीरियड का पक्षी हो या जानवर वो भी अपने तरीके से आनंद ले रहे हैं. ऐसे में ये बहुत जरूरी हो गया है कि हम इस बात को भी याद रखें एक तरफ जहां प्रकृति खुद को ठीक करने में लगी हुई है, वहीं हमें भी अपनी जिम्मेदारी को समझना होगा.

इस विषय पर कोरोना योद्धा डॉक्टर अंकित गुप्ता कहते हैं कि हमें संकल्प लेना चाहिए कि हमें कम से कम एक पौधा अपनाना चाहिए. यानी हमें O2P2IN2020 (ONE PERSON ONE PLANT IN YEAR 2020) के प्रति अपनी जिम्मेदारी तय करनी होगी.

ऐसा इसलिए क्योकि एक न एक दिन हम खुद को कोरोना वायरस के संक्रमण से जरूर बचा लेंगे मगर जिस दिन पृथ्वी ने प्रकृति पर संक्रमण कर दिया तो हमें बचाने वाला कोई नहीं होगा.

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