“जब तक आखिरी प्रवासी घर नहीं पहुंचता, तब तक नहीं रुकऊंगा”: सोनी सूद

  • सोनू सूद ने प्रवासी यात्रियों के लिए अन्य आवश्यक व्यवस्था की
  • रेलवे स्टेशन पर सभी व्यवस्थाएं देखने पहुंचे

नई दिल्ली. कोरोना वायरस लॉकडाउन के बीच सोनू सूद प्रवासियों की मदद कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर लगातार उनके चर्चे हैं. सोनू लॉकडाउन शुरू होने के बाद से सुर्खियों में बने हुए हैं. कई दिनों से वो मुंबई में फंसे हज़ारों प्रवासी कर्मचारीयों को अपने घर बसों द्वारा वापस भेज रहे हैं. अब सोनू सूद ने ट्रेनों के माध्यम से वापसी की सुविधा शुरू कर दी है.

प्रवासियों के लिए सोमवार को रात 2 बजे ठाणे रेलवे स्टेशन से दो विशेष ट्रेनों ने उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए रवाना किया. सोनू सूद ने ठाणे स्टेशन पर खुद जाकर सारी व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया. प्रवासियों की सुरक्षित यात्रा के लिए सोनू सूद ने भोजन के पैकेट, पीने का पानी, फेस मास्क, हैंड सैनिटाइज़र जैसी जरूरी वस्तुओं का प्रबंध किया. वहां मौजूद लोग सोनू सूद का धन्यवाद भी करते दिखे.

सोश्ल मीडिया पर सोनू सूद का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में वह ठाणे रेलवे स्टेशन पर लोगों से बात करते हुए दिखाई दे रहे. सोनू सूद तब तक स्टेशन पर मौजूद रहे, जबतक की ट्रेन स्टेशन से रवाना नहीं हो गई. इसके पहले भी उन्होनें प्रवासी मजदूरों को उनके घर पहुंचाने मे मदद की है.

बसों के द्वारा सोनू सूद ने अनेक बेसहारा मजदूरों को उनके घर सुरक्षित पहु्ंचाया है. उन्होंने एक हेल्पलाइन नंबर के जरिए भी लोगों से कनेक्ट किया है. सोनू सूद का कहना है, “अभी मुझे बहुत सारे संदेश और सैकड़ों ईमेल रोज़ मिलते हैं जो कहते हैं. कि वे यात्रा करना चाहते हैं. मैं सुबह से शाम तक नॉन-स्टॉप इन चीजों का ध्यान रख रहा हूं. इस लॉकडाउन के दौरान यह मेरा एकमात्र काम बन गया है. इतनी संतुष्टि कि मैं शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकता”. इनके इस नेक काम की तारीफ देश भर में की जा रही है.

मुम्बई ठाणे रेलवे स्टेशन पर सोनू सूद से बातचीत की गई. इसी बीच उन्होनें लोगों के दिल छू जाने वाला ब्यान दिया. उन्होंने कहा कि “मुझे लगता है कि यह मेरा कर्तव्य है कि मैं प्रवासियों जो कि हमारे देश के दिल की धड़कन हैं उनकी मदद करूं. हमने प्रवासियों को अपने परिवारों और बच्चों के साथ हाईवे पर चलते देखा है. हम सिर्फ एसी में बैठकर ट्वीट करके चिंता नहीं जता सकते. सड़कों पर उतर कर इनकी मदद करना जरूरी है. अगर आज ये काम नहीं किया तो प्रवासियों को यह भरोसा नहीं होगा कि कोई व्यक्ति उनके लिए खड़ा है. इसलिए मैं उनकी यात्रा के लिए इंतजाम कर रहा हूं. इसके लिए अलग अलग राज्यों से भी अनुमति ली है.”

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घर चलें❣️@goel.neeti

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उन्होंने आगे कहा, “जब मैं इन प्रवासियों और उन सभी लोगों को देखता हूं जो पीड़ित हैं. तो मुझे लगता है कि हमने एक इंसान होने का सम्मान खो दिया है. मैं रात में ठीक से सो नहीं पाता क्योंकि मेरे दिमाग में विचार आते रहते हैं. मैं ईमेल पढ़ रहा हूं. उनके फोन नंबरों को नोट कर रहा हूं. उन्हें कॉल करने की कोशिश कर रहा हूं. उनमें से सैकड़ों लोग हैं. मैं उन्हें उनके परिवारों के साथ फिर से मिलाऊं. और मै तब तक नहीं रुकऊंगा, जब तक मुंबई का आखिरी मजदूर अपने घर नहीं पहुंच जाता.”

Anjali Kumari

Aspiring news reporter and radio jockey.

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